अगर में कहूँ की यही सच्चई हैं तोह..

अभी कॉलेज चालू हुए हफ्ता भर भी नहीं हुआ था कि तुम मिलने को बेचैन से हो रही थी। बेकरारी मेरी तरफ से भी , आखिर क्यों नहीं होगा आखिर बहुत समय के बाद मिलने का मौका जो था।कोशिश दोनों तरफ से थी मिलने की पर हमेशा कोईना-कोई अड़चन आहि जाती थी। कभी में नहीं आ पता तोह कभी तुम। कहने को तोह हम पास ही थे पर फिर भी मिलना नहीं होता था।

आज फिर्से तुमने पूछा पर मैंने बहाना लगा दिया जैसा इतने दिनों से करता आराह था। यह सुनकर तुम्हें बुरा तोह ज़रूर लगा होगा में अच्छी तरह से जानता हूं कि जाभ आपने ही ऐसा बर्ताव करे तोह कैसा लगता है। पर में मजबूर था मेेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं था। तुम्हारा दिल नहीं दुखाना चाहता था। यह झूठ का सिलसिला आगे भी चलता रहता अगर आज तुम्हारा फ़ोन न आया होता। आज तभ तुम्हारे आवाज़ सुनी और तुम्हे परेशान व टूटा हुआ महसूस किया तोह लगा की अभ मुझे सच बता ही देना चाहिए।

हाँ अभ तक जो भी तुमसे कहता आया था वह सभ सच नहीं था। पर अभ में सभ सच-सच कहना चाहता हूँ। शायद यह सुनकर तुम मुझे कभी भी माफ़ न कर पाओ पर अभ यह ही सचाई है चाहे कैसे भी हो। हम अभ कभी भी नहीं मिल सकेंगे… हाँ में सच कह रहा हूँ. अभ हिम् एक दूसरे को भूल जाए तोह ही अच्छा होगा। बात यह है कि में तुमसे क्या कॉलेज के किसी भी दोस्त से नहीं मिल सकता क्योंकि में यहाँ हूँ ही नहीं। मेरे घरवालो ने सोचा की मुझे बहार भेजा जाए पढ़ने के लिए इसलिए उन्होंने मेरा अड्मिशन विदेश में जर्मनी में कराया है। अभी में तुमसे मीलों दूर हूँ।

शायद ही फिर से कभी मिल सके। कामना करता हु की तुम भी मेरे बिना जीना सीख लोगी। तू। भी मुझे भुला के अपनी जिंदिगी में आगे बढ़ जाओगी। आशा करता हूँ की तुम अपने जीवन से मुझे एक बुरे सपने की तरह निकल दोगी। मन तोह नहीं है पर शायद यह ही किस्मत को मंज़ूर था हम दोनों का साथ सिर्फ यही तक का था।

-मिस्टर.लोनली

मैंने क्या-क्या खोया

लोग कहते है की जीवन में खोना-पाना तोह लगा ही रहता है। परंतु खुश मनुष्य वही है जो जीवन को हर पल एक ही तरह से ख़ुशी से जिए। मैंने भी सोचा की जो खोदिया सो खोदिया उसे याद करने से कुछ अच्छा नहीं होगा।

लेकिन फीफा भी एक बार बस एक स्मृति के रूप में यहाँ लिख देता हूँ ताकि और लोग कुछ सीख सके। जीवन की भाग-दौड कुछ समय निकलने और आत्मविश्लेषण करने के बाद पाया की खोया तोह बहुत कुछ है। खिलौनों से लेकर आपनो तक। बहुत से रिश्ते,दोस्त,विश्वाश… पर में समझता हूँ की यह सभी तोह हम सभ के साथ होता है इसमे अलग क्या है।

लेकिन मैंने कहीना-कही खुद को भी खो दिया है। में इस सभ में खुद को भी भूल गया हूँ। अपनेआप का साथ भूल गया हूँ दूसरो का साथ निभाने के चक्कर में। खुद सद ही भागता फिर रहा हूँ। डरता हूँ की कभी खुद से सामना होगया तोह कैसे नज़र मिलेंगे खुदसे। पर अभी कुछ दिनो से फिर से खुद को तलाश रहा हूँ देखो ज़्यादा देरी तोह नहीं हुई।
सच कहते है की अगर भूला शाम को घर लौट आता है तोह उसे भूला नहीं कहता।अंत में सबसे कहना चाहता हूँ की इस फटाफट जीवन में आपने से नाता न तोड़े। जितना खुद को जानेंगे उतनी ही नए नए बातें पता चलेगी।।