क्यों औरत के हिस्से में उसका इतवार नहीं आता।।

– प्रतिमा द्विवेदी जी 

श्री प्रतिमा जी ने इस कविता के द्वारा औरतों की कर्मठता और संघर्ष को दिखाय है। उन्होंने इतने सरल व सुलभ शब्दों में औरतों के जीवन का वर्णन किया है की कोई भी आसानी से समझ सके।

हम सभ ने अपनी-अपनी माँ  को देख है कि वह कैसे पूरे दिन-रात निस्वार्थ हम सभ के लिए बिना अपेक्षा रखे काम करती है। ठीक इस ही तरह हर औरत कर्म को अपना कर्त्तव्य मानकर चलती है। 

आथ:मेरी तरफ से हर एक स्त्री को शत-शत नमन क्योंकि वह हमेशा ही अपने से कही ऊपर अपने परिवार को रखती है।

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